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गाजी गाजी सरकार की पहली मशहूर करामत

गाजी गाजी सरकार की पहली मशहूर करामत बे औलाद को औलाद मिल गई बाझ की कोख भर गई gazi sarkar ki kramat
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गाजी गाजी सरकार की पहली मशहूर करामत 

गाजी गाजी सरकार की मशहूर करामत


हज़रत सैय्यद सालार मसऊद गाजी अलैहिर्रहमां हिन्दुस्तान में उन शोहदाए इस्लाम में से है जिनकी जाते रूहानी फैज़ान और अज़ीम करामतों का मरकज़ है। आपके आस्ताने से लाइलाज मरीज़ शिफा पाते हैं। विशेष रूप से कोढ़ी मुकम्मल तौर से सेहतयाब होते हैं अन्धों की आंखों को रौशनी मिलती है आपके सदके और वसीले से मांगी मुरादें मिलती हैं गूंगे को ज़बान और बे औलाद को औलाद अता होती है। दर हकीकत आपकी जात हजरत ईसा अलैहिस्सलाम के मोअजिजात का मजहर और करामात का आइना है अल्लाह के फजल से आपके दर पर आने वालों की जरूरतें पूरी होती हैं और मुश्किलें आसान होती हैं यहां तमाम धर्मों के लोग मुसलिम तथा गैर मुसलिम आपकी बारगाह से फैज़ियाब होते हैं और अपनी खाली झोलियां भर कर जाते हैं।


जासो की गोद भर गई गाजी के फैज से


हज़रत गाजी अलैहिर्रहमां की सबसे पहली करामत जो मशहूर हुई वह यह है कि मौजा नगरौर जिला बहराइच में नन्द नहर अहिर जॉगद मल का चरवाहा था उसकी शादी हुए कई साल हो गये थे लेकिन उसके यहां कोई बच्चा पैदा नहीं हुआ। उसकी औरत जासो की गोद कई जमाने तक खाली थी। पास पड़ोस के लोग उसे बांझ पन का ताना देने लगे ला-औलादी का गम उस पर लोगों के ताने जख्म पर नमक का काम करने लगे वह हमेशा गमगीन और दुःखी रहती एक दिन उसकी सास भी ताना देते हुए कहने लगी कि तू मनहूस है मेरे घर से दूर हो जा तू बांझ है। तेरी कोक से कोई बच्चा जन्म ले यह नामुमकिन है। मैं अपने लड़के की शादी दूसरी जगह कर दूंगी। तुझसे कोई वास्ता नहीं रहेगा औरत के दिल पर चोट लगी आंखों में आंसू भरे घर से निकल खड़ी हुई। तीन चार मील चलने के बाद हजरत गाजी अलैहिर्रहमा की मजार के पास थक कर बैठ गई खादिमान दरगाह हजरत सैय्यद हाजी अहमद व सैय्यद हाजी मोहम्मद उसे बहुत ज्यादा रंजीदा और गमजदा देखकर वजह पूछी तो उसने रो-रो कर अपने हालात बयान किये आप हजरात ने तसल्ली देते हुए कहा कि सब्र से काम लो यह सालार गाजी आस्ताना है यह अल्लाह की राह में शहीद हुए हैं इनका मरतबा अल्लाह के यहां बहुत बुलंद है अपना दामन फैला कर अपनी मुराद मांग । इन्शा अल्ला आपकी दुआ की बरकत से तेरे दिल की कली खिल जायेगी और तेरी गोद भर जायेगी। जासो ने रो-रोकर हजरत गाजी अलैहिर्रहमा की दुहाई देते हुए अपनी मुराद मांगनी शुरू कर दी इतने में उसका शौहर नन्द महर जिसे वाकई अपनी औरत से दिली मुहब्बत थी ढूंढते हुए आस्ताने गाजी पर आ पहुंचा बीबी से दुःख भरी दास्तान सुनने के बाद उसने दुआ की और मन्नत मानी फिर दोनों घर लौट आये। अल्लाह का फजल हुआ। उसी रात औरत उम्मीद से हो गई और 9 माह बाद एक बच्चा पैदा हुआ। उन्हे यकीन हो गया कि मालिक ने हमें जो बच्चा अता फरमाया है यह हजरत सैय्यद सालार की दुआ की बरकत है। उसी तारीख से यह दोनों मियां बीबी बड़ी अकीदत के साथ सोमवार के दिन आस्ताने गाजी पर हाजिर होते अकीदत के फूल पेश करते मशहूर है कि उन्हीं लोगों ने गाय के दूध और चूने के गारे से हजरत गाजी अलैहिर्रहमा की मजार को पोख्ता बनाया और यह लोग मारे खुशी के चलते फिरते उठते बैठते हजरत गाजी अलैहिर्रहमा की इस करामत का चर्चा करते। आपकी यह करामत इतनी मशहूर हो गयी कि जो भी किसी मुसीबत में मुबतिला होता आपके दर पर हाजिर होकर मन्नते मांगता इस तरह रोज बरोज जायरीन का हुजूम बढ़ता गया।

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