अल्लाह की एक मेहबूब बन्दी का इश्के इलाही Allah Ki Bandi Islamic Waqya
Islamic Waqya
हजरत जुलनून मिश्री रहमातुल्लाह अलै फरमाते हैं कि मैं कबीला बनी इसराइल में एक औरत से मिला जो बालों का एक कुर्ता पहने हुये और उनकी एक ओढ़नी ओढ़े हुये थी और हाथ में एक लोहे का असा था मैंने करीब जाकर सलाम किया सलाम का जवाब देकर कहा मर्दों को औरतों से क्या मतलब है मैंने कहा तुम्हारा (दीनी) भाई जुलनून हूं कहां मरहबा आइये मैंने पूछा तुम यहां किस शगल में हो कहां मेरी शगल क्या पूछते हो मेरी हालत तो येह है कि जब किसी ऐसे शहर में मेरा गुजर होता है कि वहां मेरे महबूबे हकीकी की मुखालफत और ना फरमानी होती हो तो वहां का रहना मुझे गिराँ गुजरता है कि फिर कोई और पाक जगह ढूंढती हूं और वहां जाकर अपने क्लब(dil) से जो शिद्दते शौख से शौखता वा गुदाख्ता हो रहा है मुनाजात करती हूं,
Islamic Waqya
जुलनून मिश्री रहमातुल्लाह अलै फरमाते हैं कि फिर मैंने कहा कि तुम महबूबे हकीकी की बातें खूब करती हो भला येह तो बताओ कि मोहब्बत की हकीकत क्या है कहां शुभहान अल्लाह तुम ऐसे जलीलुलकद्र वा अजम और हकीम हो कर मुझसे मोहब्बत की हकीकत दरियाफ्त करते हो सुनो मोहब्बत की शान येह है कि जब वोह शुरू हो जाती है तो मुहिब को एक दायमी अलम और कलक लग जाता है कशरते मोहब्बत से अहले मोहब्बत की अरवाह गायत सफाई पर पहुंच जाती है तो अल्लाह ताला उन्हें अपनी मोहब्बत के मजीद अरजान से शेराब करता है जिसे वोह खूब मजे लेकर पीते हैं येह कहकर एक चीख मारी और बेहोश होकर गिर पड़ी फिर जब होश में आई तो येह असआर पढ़े,
Islamic Waqya
अये मेहबूबे हकीकी मुझे आपसे दो किस्म की मोहब्बत है इस वास्ते कि आप मेहबूब बनने के अहल हैँ पहली किसिम की मोहब्बत जिसका इकतेजा मुझमे है उसका असर तो ज़िक्र है कि जिससे आपने अपने मसावई से मुझे अलेदह कर दिया और वोह दूसरी किसिम की मोहब्बत जिसके आप अहल हैँ उसका सुमरा ये है कि आप हिजाब सामने से उठा दें ताकि मैं आपको देखु और दोनों किसिम की मोहब्बत मे मेरा कुछ कमाल नहीं इस लिये मेरी इसमें कोई हम्द नहीं बल्कि हर सूरत मे आप ही के लिये हम्द और सतूदगी साबित है