जिहाद कैसे करें अपने आप से हज़रत जुलनून मिश्री
Jihad Kaise Kare
Jihad karne ka tarika जिहाद करने का तरीक़ा
हजरत जुलनून मिश्री की तमाम उम्र अपने नफ्स के खिलाफ जंग करते हुए गुजर गई आपका कहना था कि नफ़्स से सुलह करने वाला शख्स खुदा का दोस्त नहीं हो सकता आम इंसानों की तरह आपको भी लजीज खानों की ख्वाहिश थी लेकिन कभी अपनी ख्वाहिश पूरी न की एक मर्तबा ईद की सुबह जब मेरे नफ़्स ने तकाजा किया कि आज तो कोई लजीज गिजा तो जरुर मिलनी चाहिए तो फरमाया कि अगर तू दो रकात नमाज में पूरी कुरान मुकम्मल कर ले तो मैं तेरी ख्वाहिश पूरी कर दूंगा नफ़्स ने आपकी यह शर्त मंजूर कर ली और खत्म कुरान के बाद जब आप लजीज खाना लेकर आये तो पहला ही लुकमा उठाकर हाथ खींच लिया और नमाज के लिये खड़े हो गए,
Jihad Kaise Kare
और जब लोगों ने आपसे इसकी वजह पूछी तो फरमाया कि पहले ही लुकमें पर नफ़्स ने खुश होकर कहा कि आज 10 वर्ष के बाद तेरी ख्वाहिश पूरी हो रही है चुनानचे मैंने लुकमा हाथ से छोड़कर कहा कि मैं तेरी येह ख्वाहिश कभी पूरी ना होने दूंगा लेकिन उसी वक्त एक शख्स उम्दा खाने की डेग लेकर हाजिर हुआ और अर्ज किया कि मैं बहुत मुफलिस हूं और बच्चों वाला हूं मगर आज सुबह ईद की वजह से मैं लजीज खाना पकवाया और सो गया चुनानचे ख्वाब में हुजूर अकरम सल्लल्लाहू अलैहे वसल्लम की जियारत हुई तो आपने फ़रमाया कि अगर तु मेहशर में मुझसे मिलने का आरजू मंद है तो ये खाना जुलनून को दे आ और मेरा ये पैगाम पंहुचा दे कि वक़्ती तोर पर अपने नफ़्स से सुलह करके इस खाने के दो एक लुकमे चख लें हुजूर का ये पैगाम सुनकर मैंने दस साल के दौरान पहली मर्तबा थोड़ा सा अच्छा और लजीज खाना चख लिया
