अल्लाह को दिल मे बसाना सीखो अल्लाह से मोहब्बत सुफी इस्लाम Sufi Islam Sufi Muslim
जुलनून मिश्री रहमातुल्लाहअलै फरमाते हैं कि मैं अंताक्या के एक पहाड़ पर जा रहा था की एक दीवानी सी लड़की सौंफ का जुबा पहने हुए नजर पड़ी मैंने सलाम किया उसने जवाब देकर कहा कि तुम जुलनून हो मैंने हैरान होकर पूछा कि तूने मुझे किस तरह पहचाना कहा महबूबे हाकीकी की मार्फत से फिर कहा कि जुलनून मैं ये दरयाफ्ट करती हूं की शखा क्या चीज है मैंने कहा सखावत वाद वा दहश्त है कहा ये तो दुनिया की सखावत है दीन की सखावत किया है,
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मैंने कहा अल्लाह की इताअत मे सई करना. कहा जब बन्दा इताअत मे सई करता है तो मेहबूबे हकीकी कलब पर मुतजल्ली होता है लेकिन उस वक्त चाहिए कि उससे कुछ ना मांगे अये जुलनून बीस बर्ष से मेरा इरादा होता है कि उससे एक सई तलब करुँ मगर उससे शर्म आती है कि बुरे मजदूर की तरह हो जाऊ कि वोह जब काम करता है तो फ़ौरन ही उजरत मांग लेता है इसलिये मैं उसकी ताजीम और जलाल की वजा से काम करती हू येह कहा और रवाना हुई
