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रूहानियत का असल राज लफ्ज अल्लाह है

रूहानियत का असल राज लफ्ज अल्लाह है
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 रूहानियत का असल राज लफ्ज अल्लाह है

रूहानियत का असल राज लफ्ज अल्लाह है


सरखिस के कयाम के दौरान हजरत अबु अल सईद अबु अल खैर की मुलाक़ात शैख़ तरीकत हजरत पीर अबु अल फजल से हुई एक दिन आप नहर के किनारे तसरीफ लेजा रहे थे कि हजरत पीर अबु अल फजल भी उधर से आगये उन्होंने झुकि सी नजर आप पर डाली कि दिल वरफ्ता हो गया और फिर आप उनके हल्का इरादत मे दाखिल हो गये इस दौरान आप हुसुले इल्म भी करते रहे जब फ़ारिग हुऐ तो एक दिन मुर्शिद ने आपका हाथ पकड़ा और खानकाह मे ले गये और फरमाया अबु सईद जितने अम्बिया वा मुर्सलीन दुनियां मे ताशरीफ लाये हैँ सबने एकही लफ्ज अल्लाह को मकसूद ठहराया है तुम भी उसके हो जाओ वोह लोग जौ अल्लाह के हो गये वोह पाक हो गये ये सुनने की देर थी कि आपको ये महसूस हुआ जैसे सीना सक हो गया हो और आपकी जात को आपसे छीन लिया गया हो मस्त हो गये पस वा पेश का होस ना रहा एक मुद्दत तक मुर्शिद की खिदमत मे ग्रिफ्तारे हक के साथ कलमा का हक अदा करते रहे एक रोज मुर्शिद ने फरमाया,



आये अबु सईद इस पाक कलमा के हरुफ के दरवाजे तुमपर खोल दिए गये अब मुआर्फ़त इलाही के लश्कर तेरे सीने पे उतरेंगे और अजीब वा गरीब मुसाहदात वा मका शिफ़ात होंगे इस लिये खुलूत इख़्तियार करो ताकि तकमील हो सके आपको तसनीफ वा तालीफ का इबतेदा से ही शौख था लेकिन जब आप पर ये मुकाम आया तो उलूम वा फुनून को एक तरफ रखना पड़ा आपने तमाम कलबी मसूदात को जमीन मे दफ़न कर दिया और उनसे मुख़ातिब होकर फरमाया कि उसूल इल्लल्लाह के बाद तुम मे मशगूल रहना अमर मुहाल है चुनानचे आप मुर्शिद के फरमान के मुताबिक आप मीनह ताशरीफ ले गये और घर के एक कोने मे बैठकर अल्लाह अल्लाह करने लगे जब कभी ऑँघ नींद आने लगती तो मेहराब मेसे एक शख्स आतिसे हथियार लिये नमुदार होता और निहायत हैबत नाक आवाज़ मे कहता अबु सईद अल्लाह अल्लाह कहो नतीजतन आप उस खौफ से दिन और रात के किसी भी हिस्से मे भी एक पल के लिये भी सो ना सकते थे इस तरह 7 साल बीत गये हत्ता कि आपके वुजूद से अल्लाह अल्लाह की अवाज बुलंद होने लगीं आप फिर मुर्शिद नापीर अबु अल फजल हसन की खिदमत आलिया मे हाजिर हो गये उन्होंने खानकाह मे आपको एक जघा अता फरमादी और आपके अफआल वा तहजीब वा इखलाक पर नजर रखने लगे एक मुद्दत गुजारने के बाद मुर्शिद कामिल ने फरमाया कि खुलूट गाह मे आजाये वहाँ फिर आपने अपने मुरीद खास रियाजत वा मुजाहदात की निगरानी फरमाइ और फिर मीनह मे वापिस भेज दिया कि वालदा की खिदमत मे लग जाओ हस्बे इरशाद आप वापिस अपने शहर चले गये,,,

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