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सालार शाहू और काहीलर की जंग Salar Sahu Aur Kahilar Ki Jung

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जब सालार शाहू ने दस साल तक अजमेर में कयाम करके अमनो, अमान अर्थात शान्ति कायम कर ली और हिन्दुस्तान के जीते इलाकों पर अपना दबदबा बना लिया और विरोधियों पर पूरी तौर से गालिब आने के बाद मुतमईन हो गये, उनसे आसानी से लगान (खिराज) मिलने लगा तो उस समय सुल्तान महमूद गजनवी के पास नाजिम काहिलर मलिक छज्जू की ओर से यह शिकायत पहुंची कि दामने कोह के सरकस कुफ्फार एक संयुक्त मोर्चा बनाकर काहिलर के आस पास के इलाके को ताराज कर देने की कोशिश में लगे हुए हैं। सुल्तान उस वक्त खुरासान की मुहिम पर था। अतः उसने खबर पाते ही सालार शाहू के नाम सख्त अल्फाज में शाही फरमान लिखा कि आधी सेना अजमेर में छोड़ कर दूसरी आधी सेना लेकर तुरन्त काहिलर पहुंचों। बागियों की सरकूबी करके उन्हें उनके अन्जाम तक पहुंचा दो, मैं एक जरूरी मुहिम पर हूं वरना मैं खुद उनकी खबर लेता। काहिलर पर्वत कशमीर की घाटी में वाके था। उसका किला बड़ा ही आलीशान था। और मरकजी हैसियत रखता था। उस पर राय गुलचन्द का कब्जा था जो बड़ा दौलतमंद और मगरूर राजा था। जब सुल्तान ने कन्नौज पर चढ़ाई की थी तो अतराफे कशमीर में पहुंच कर उस समय बड़ी मुश्किल से राय गुलचन्द को 50 हजार सिपाहियों के साथ पराजित करके किले को फतह किया। और यहां अपना हाकिम नियुक्त किया। हजरत सालार शाहू, सुल्तान महमूद गजनवी का संदेश पाकर अजमेर का किला और अपने इकलौते पुत्र व पत्नी सतरे मुअल्ला को मीर सैयद इब्राहीम बारह हजारी, मुजफ्फर खां व अन्य योग्य एवं बहादुर उम्रा की निगरानी में सुपुर्द करके आधी फौज लेकर काहिलर की ओर रवाना हुये। अगर चे सरकार शाहू काहिलर पहुंचने में बड़ी तेजी दिखाई मगर बागियों ने नाजिम काहिलर को फुर्सत न दी। काहिलर को एक बड़ी फौज ने घेर लिया तो काहिलर के हाकिम ने अपने को एक किले में बन्द कर लिया हजरत सालार शाहू के पहुंचते पहुंचते शत्रु सैनिक


काहिलर को पूरी तरह लूट चुके थे और वहां से लौट रहे थे कि सालार शाहू ने उन्हें घेर लिया और युद्ध शुरू हो गया। इस्लामी सेना हालाकि अभी रास्ता और सफर की मुसीबतों को झेलते हुए भूखी प्यासी और थकी हारी थी एक दम सांस लेने का मौका भी नहीं पाया था लेकिन बहुत बहादुरी के साथ शत्रु सेना का मुकाबला किया कई दिन तक जंग जारी रही। आखिर कार अल्लाह के फजल से इस्लामी सेना को कामयाबी मिली। शत्रु सेना को मुंह की खानी पड़ी। इस युद्ध में हजारों आदमी मारे गये और शत्रु पक्ष के चालिस सरदार गिरफतार हुए। जीत की खुशखबरी सुन कर सुल्तान बहुत खुश हुआ और उसने एक फरमान के द्वारा काहिलर का जीता हुआ इलाका सालार शाहू को इनाम में दिया।

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