गाजी सरकार दरियाये सिंध के किनारे
हजरत सालार मसूद गाजी वाल्देन करिमेन की जुदाई के बाद रास्ते के मसाइब वा अलाम झेलते हुऐ जब दरियाये सिंध के किनारे पहुचे तो अमीर हसन और अमीर बा यजीद जाफर ने आपके हुकुम के मुताबिक हजार सवार से शिव पुर का मुहासरा किया राय अर्जन को शिकस्त देकर उसके घर और हवेलयों पर कब्ज़ा करके दस लाख सोने के सिक्के और काफी माल वा असबाब हाथ अये वोह सारा माले गनीमत आपकी खिदमत मे पेश किया हजरत ने इरशाद फरमाया कि ये तुम्हारी पहली फतेह के नतीजे मे हासिल हुआ है इस लिये इसे खर्च करलो फिर कश्तीयो पर सवार होकर दरिया पार होकर मशरिक किनारे पार आये और चंद रोज क्याम फरमाया शिकार के लिये जघा अच्छी थी आप यहाँ शिकार खेलते रहे और अहले लश्कर आस पास के इलाके फतुहात करते रहे,
चंद दिनों के बाद जब दरियाये सिंध से कूच करके मुल्तान मे पहुचे तो मुल्तान के जमीनदार नागपाल से जंग छिड़ गई देर तक घमासान की लड़ाई होती रही जिसमे दोनों तरफ से बेशुमार आदमी काम आये आखिर कार नागपाक की शिकस्त हुई और काफी माल गनीमत हाथ आये जिसे आपने अहले लश्कर मे तक्सीम फरमाया अब चुंकि बरसात का मौसम शुरू हो गया था इस लिये चार माह मुल्तान मे रह कर अजौधन की तरफ कूच फरमाया अजौधन उस जमाने मे बहुत आबाद था मगर बगैर जंग के फतह हो गया आपको अजौधन की अब वा हवा बहुत पसंद आई शिकार गाह भी यहाँ अच्छी थी लेहाजा 9महीने यहाँ क्याम फरमाया हत्ता कि दूसरा बारिश का मौसम आगया चुनानचे यें बरसात भी वहीं गुजारी उसके बाद दिल्ली की तरफ रुख किया,
Gazi pak