अल्लाह से मोहब्बत एक दीवाना और जुलनून मिश्री का वाक़्या allah ka dost Allah se Mohabbat
जुलनून मिश्री रजि अल्लाहू ताअला अन्हु से रीवायत है कि मैं एक रोज बैतुल्लाह का तवाफ कर रहा था और हालत येह थी कि सब लोगों की आंखें बैतुल्लाह की तरफ लग रही थी और उसे देख-देख कर ठंडी आहे भर रहे थे के उसे वक्त एक शख्स बैतुल्लाह के मुकाबिल होकर इस मजमून के दुआ करने लगा, अये मेरे परवरदिगार मैं तेरा मिस्कीन बन्दा और तेरे दर से भागा हुआ और धुटकारा हुआ हूँ अये अल्लाह मैं ऐसी चीज का सवाल करता हूँ कि वोह आपकी मोहब्बत और कुर्ब का जियादा जरिया हो और ऐसी इबादत मांगता हूँ जो आपको जियादा पसंदीदा हो और अये अल्लाह मैं आपसे आपके बरगुजिदा बन्दों और अम्बिया के वसीले से सवाल करता हूं कि अपनी मोहब्बत का प्याला मुझे पिला दीजिए और मेरे दिल से अपनी मुआर्फ़त के लिये हजल के परदे उठा दीजिये ताकि मैं शउक्के के बाजूओं से आप तक उड़ कर इरफान के बागों में आपसे मुनाजात करुँ,
इस दुआ के बाद वोह शख्स इतना रोया की आंसुओं से जमीन की कंकरिया तर हो गई फिर हंसा और वहां से चल दिया मैं भी उसके पीछे-पीछे हो लिया और अपने जी में कहा या तो येह शख्स कोई आरिफ है अल किस्सा वोह मस्जिद ए हरम से निकलकर मक्का मुकर्रमा के वीराना के तरफ हो लिया फिर मुझे मुखातिब होकर कहा तुम्हें क्या हुआ क्यों आ रहे हो जाओ, मैंने पूछा आपका नाम क्या है कहा अब्दुल्लाह मैंने पूछा किसके बेटे हो कहा अब्दुल्ला का मैंने कहा कि ये तो मैं जानता हूं कि सारी खलकत अब्दुल्ला है ( अल्लाह के बन्दे) और इब्ने अब्दुल्ला ( अल्लाह के बन्दे के बेटे)हैँ मैं आपका खास नाम दरियाफ्त करता हूं कहा मेरे बाप ने मेरा नाम सादून रखा है मैंने कहा जो मजनून के नाम से मशहूर है कहा हां वही मैंने पूछा कि वोह कोन लोग हैं जिनके वसीला से तुमने अल्लाह ताला से दुआ की है फरमाया कि वोह अपने अल्लाह की तरफ ऐसे चलते हैं जैसे वोह चलता है और वोह खुदा की मोहब्बत को नसब अल अइन किये हुये और लोगों और तमाम दुनिया की चीजों से ऐसे अलग हुये हैं कि जैसे किसी के दिल में आग लगी हुई हो,
