आग की पूजा करने वाले मुसलमान कैसे हुऐ चिड़िया को दाना डालना Chidiya Ko Dana Dalna Aag Ki puja Aur Musalman
islamic story in hindi
हजरत जुलनून मिश्री फरमाते हैं कि सफर के दौरान मेरा एक बर्फ पोस शहरा से गुजर हुआ तो मैंने देखा कि एक आतिश परस्त अनाज बिखेरने में मसरूफ है आपके दरयाफ्ट करने पर उस ने बताया कि ऐसी हालत में परिंदों को चूंकि कहीं से दाना दनका कहीं से सेर नहीं होता इसलिए मैं सवाब की नीयत से दाना बीखेर रहा हूं इस पर मैंने उससे कहा कि अल्लाह के यहां गैर की रोजी ना पसंदीदा है लेकिन उसने अर्ज किया कि मेरे लिए बस इतना ही काफी है कि वोह मेरी नियत को देख रहा है,
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इसके बाद मैंने उस आतिश परस्त को आयामे मैं हज के दौरान बडी दीवानगी के आलम में बैतुल्लाह का तवाफ करते देखा और तवाफ के बाद उसने मुझसे कहा आपने देखा कि परिंदों के लिए जो मैंने दाना दनका बिखेरा था उसका फल मुझे इतनी बेहतर शक्ल में मिला है,
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हजरत जुलनून मिश्री फरमाते हैं कि यह सुनते ही मैंने पुरजोश लहजे में अल्लाह ताला से अर्ज किया कि तूने 40 बरस तक आग पूजने वाले को तो अनाज के चंद दानों के एवज ऐजा फरोसी करते हुये इतने बडी नियामत से क्यों सरफराज फरमाया इस पर गैब से आवाज आई कि हम अपनी मर्जी के मुखतार हैं और हमारे मुआमलात में किसी को मुदाखलत की इजाजत नहीं,
