Hazrat habib ajami ka ruhani tasarruf
Hazrat habib ajami aur Khuwaja hasan basri
Hazrat habib ajami
Hazrat Khuwaja hasan basri
Wali allah ki Kramat
मनकूल है कि एक मर्तबा हसन बसरी हजाज बिन युसफ के सिपाहियों से छिपते हुऐ हज़रत हबीब अजमी के इबादत गाह मे पहुंच गये और जब सिपाहियों ने हबीब अजमी से मालूमात हासिल क़ी तो उन्होंने साफ बता दिया कि हसन इबादत गाह के अंदर हैँ लेकिन पूरे इबादत खाने की तलाशी के बावजूद भी हसन बसरी का सुराग ना मिल सका और हज़रत हसन फरमाते हैँ कि सात मर्तबा सिपाहियों ने मेरे ऊपर हाथ रखा लेकिन मुझे ना देख सके...
फिर सिपाहियों ने हज़रत हबीब से कहा कि हजाज तुमको दरोग गोई की सजा देगा आपने फरमाया कि हसन मेरे सामने इबादत गाह मे दाखिल हुऐ थे लेकिन अगर वोह तुम्हे नज़र नहीं अये तो उसमे मेरा किया कुसूर है चुनानचे दुबारा फिर तलाशी ली लेकिन उनको ना पाकर वापिस आगये हज़रत हसन ने बाहर निकल कर हज़रत हबीब से कहा कि आपने तो उस्तादी के हक का भी कुछ पास नही किया और साफ साफ उन्हें मेरा पता बता दिया...
उन्होंने जवाब दिया कि चुंकि मैंने सच से काम लिया इसलिए आप मेहफ़ूज़ रहे और अगर मैं दरोग गोई से काम लेता तो फिर यक़ीनन हम दोनों ग्रिफ्तार कर लिये जाते ये सुन कर हज़रत हसन बसरी ने पूछा कि आखिर तुमने किया मंतर पढ़ दिया था कि जिसकी वजा से मैं सिपाहियों को नज़र ना आसका आपने फरमाया कि दो मर्तबा अइतलकुर्सी 2 मर्तबा सूरह इखलास और दो मर्तबा अमानर्रासुलू पढ़कर अल्लाह से अर्ज किया कि हसन को तेरे हवाले किया तूही उनकी हिफाजत करना
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