Rizq milne ka yakeen
Allah par yakeen
Hazrat Khuwaja hasan basri
Khuwaja hasan basri aur jaib ajmi
खुवाजा हसन बसरी एक रोज जेब अजमी के घर खाना खा रहे थे खाने मे एक जौ की रोटी और नमक था खुवाजा हसन बसरी ने खाना शुरू किया तो अचानक एक शख्स आ गया जेब अजमी ने खुवाजा साहब के आगे से रोटी उठाकर फ़क़ीर को देदी खुवाजा हसन बसरी को ये बात अच्छी ना लगी...
और फरमाया जैब तुममें साइस्तगी तो है मगर इल्म से बिल्कुल खाली हो किया तुम्हे मालूम नहीं है कि मेहमान के आगे से रोटी उठाकर देना इख़लाक़ क्यात के खिलाफ है और अगर खैरात करनी ही थी तो आधी रोटी भी दे सकते थे वही काफ़ी होती...
जैब अजमी खुवाजा साहब की बात सुन कर खामोश हो गये
और कोई जवाब ना दिया बल्कि दरवाजे पर नजरें जमाये रखे चंद लम्हो के बाद एक शख्स एक खुवान लेकर हाजिर हुआ और जैब जमई से कहा इस खुवान मे मुख्तलिफ अनवा के खाने हैँ और इसके इलावा ये पांच सो दिरहम हैँ खाने आपके और आपके मेहमान के वास्ते हैँ और रकम सिर्फ आपके अखराजात के लिये...
जैब जमई ने दोनों चीज़े लेली और खुवाजा हसन बसरी से फरमाया कि अब खाना तनाउल फरमाये दोनों ने शिकम शैर होकर खाना खाया खाने के बाद जैब अजमी ने खुवाजा साहब से कहा आप मेरे उस्ताद पीर वा मुर्शिद हैँ इस लिये आप के आगे दम मरने की मुझे मजाल नहीं मगर एक बात जरूर अर्ज करना चाहता हु खुवाजा साहब ने फरमाया जरूर जरूर तुम्हे इजाजत है जैब अजमी बोले या हज़रत ये सब कुछ अल्लाह ताला पर रिजक के सिलसिले मे यकीन कामिल रखने का नतीजा है और ये बात मुझे आपकी सोहबत ही से मिली है