Kisi Ko Kam Na Shamjho Khuwaja Hasan Basri
Hazrat Khuwaja Hasan Basri
Kisi Ko Jalil Na Kare
Kisi Ko Kam Ja Samjho
एक मर्तबा एक हब्सी दरया के किनारे एक औरत को अपने करीब बिठाये शराब नोसी मे मशगूल था शबाब और शराब के नशे मे वोह अपने इर्द गिर्द से बेखबर था हज़रत हसन बसरी का उस तरफ से गुज़र हुआ तो उन्होंने उसे शख्त मलामत की...
अभी आपकी बात जारी थी कि दरया के दूसरी तरफ से एक कश्ती आती हुई दिखाई दी कुछ ही देर के बाद कश्ती गिरदाब मे फसी और फिर डूब गई माल वा असबाब तमाम के तमाम गोते खाने लगे...
उसी वक़्त वोह हब्सी दरया मे कूदा और उसने पहले सवारों को फिर उनके सामान को दरिया से निकाल कर बाहर किया ये सारा वाक़्या हज़रत खुवाजा हसन बसरी ने अपनी आँखों से देखा उसी वक़्त तोबा की और अहेद किया कि आइंदा किसी जलील से जलील शख्स को भी कमतर नहीं समझेंगे