islamic stories
मशहूर सहाबी राबे(रज़ि) कहते हैँ कि जब मे खुवाजा अवैस करनी कि ज़ियारत करने को गया तो मैंने उन्हें फजर कि नमाज़ मे मशगूल पाया...
फरमाया नमाज़ से फ़ारिग हुए तो अपने दरूद वजाइफ मे मसरुफ हो गए यहाँ तक कि जुहर का वक़्त आगया फिर एक के बाद दीगरे तमाम नमजो और जिकरे इलाही मे ऐसे मग्न हुए कि सारी रात गुजर गई...
मे उनका बागोेेर मुशाहदा करता रहा इस तरह तीन दिन गुजर गए मैंने देखा और हैरान रह गया कि इन तीन दिन और रातो मे हज़रत ने ना कुछ खाया ना पिया बल्कि इबादत मे मशगूल रहे और लम्हा भर के लिये भी आराम ना किया...
चौथी रात आप थोड़ी देर के लिये सोये और कुछ खाना भी खाया फिर अस्तगफार करने लगे कि या इलाही मे तुझसे पनाह मांगता हु मे नींद और भूक के गलबा मे मुंबतिला हुआ...
रबिय कहते हैँ कि खुवाजा अवैस करनी रातो को तक्सीम कि हुई थी एक रात मे सजदा करते तो पूरी रात सजदे मे ही गुजार देते और अगर रुकु करते तो सब भर रुकु कि हालत मे खड़े रहते किसी रात को कयाम मे बसर करते गरज कि हर रात को दूसरी रात कि तरह ज़िंदा रखते थे